ए दिल इतना खुदगर्ज़ ना बन!
By Ubaid
ए दिल इतना खुदगर्ज़ ना बन!
तेरा नहीं तो क्या हुआ किसी और का सही
कोई और भी है खड़ा, तू उनसा ना बन!
ए दिल इतना खुदगर्ज ना बन!
हां, तू भी है इंसान!तेरा भी है कुछ चाहत
उन चाहतों को भुला, किसी का हमराज़ तू बन।
ए दिल इतना खुदगर्ज़ ना बन!
उम्मीद वफा यह तेरे लिए नहीं
फिर तू क्यों है इतना बेचैन?!
मिले खड़ा जब कोई हरा हरा
उसे तू आगे बढ़ा, फिर हंसते हंसते चल तू
तेरा ही तो है यह जहान!
नजर तो झुका, आंख ना मिला
रफू कर अपना पैरहन!।
ए दिल इतना खुदगर्ज़ ना बन!
ए दिल इतना खुदगर्ज़ ना बन!..
(हरा हरा= who lost
रफू=darning, पैरहन=dress)
By Ubaid

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