ऋतुराज बसन्त
By Pragati chauhan
आए हैं ऋतुराज बसंत,
आए हैं ऋतुराज बसन्त।।
जाग उठा जड़ चेतन सारा,
हर्षित है सबका मन प्यारा,
नव तरु पल्लव लहराता है,
पुष्पों का दल गहराता है,
जिसका छोर न अंत,
आए हैं ऋतुराज बसन्त,
आए हैं ऋतुराज बसन्त।।
अगवानी में कोयल कूके,
भ्रीदूसमीर प्राण जड़ फूके,
प्रिया लिखती रस भरी पाती, अपने प्यारे कंत,
आए हैं ऋतुराज बसंत,
आए हैं ऋतुराज बसन्त।।
भ्रमर दल घन झरित गुंजन,
चले समीर अति प्यारी,
श्रृंगार किया प्रकृति ने भू का बनी दुल्हनियां
प्यारी,
ये सब ऋतुओं के हैं संत,
आए हैं ऋतुराज बसन्त,
आए हैं ऋतुराज बसन्त।।
By Pragati chauhan

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