उसपर क्या बीती होगी !
By Abhay Raj Chand
दिल को पत्थर बनाकर, विदा किया था उस दिन,
माथे पर टीका लगाकर, विदा किया था उस दिन,
आंखों में आंसू भी खूब थे मगर,
उनकी खुशी के लिए मुस्कुराकर विदा किया था उस दिन।
अब तो बस उनकी तस्वीर का दीदार कर रही थी वो,
उनके वापस आने का इंतजार कर रही थी वो।
बस मेरी अमानत को सलामत रखना,
यही दुआ हर बार कर रही थी वो।
उसने जंग तो जीती, पर जिंदगी से हार गया,
जाते-जाते भी वो, दुश्मनों को मार गया।
तिरंगे की शान को झुकने नहीं दिया उसने,
भले ही अपने सीने पर, गोलियां उतार गया।।
गया तो था वो तिरंगा फहराने के लिए,
वापस तिरंगा सीने से लगा कर आया है।
भारत माता की सौगंध खाई थी उसने,
और अपना वादा वो निभा कर आया है।।
सोचो, उसपर क्या बीती होगी,
जो हर पल उसके आने का इंतजार कर रही थी।
और आज जब वो लौटा तो,
आंखों के सामने, उसकी चिता जल रही थी।।
By Abhay Raj Chand

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