उसकी खूबसूरती
- Hashtag Kalakar
- Dec 6, 2025
- 1 min read
By Chitransh Sinha
जोहऱ,
ये जो अंधकार को तुमने अपने नूर से रोशन किया है
ये जो शीरीं जैसी बोली है तुम्हारी
ये जो चश्म-ए-जानबाज़ है तुम्हारी
ये जो मेरे ज़र्रा-ज़र्रा को अपने जुनून से भर दिया है तुमने
ये जो मेरी आजकल आरज़ू उठी है तुम्हें नूर-ए-जान कहनी की
ये जो तुम्हारा हुस्न किसी हूर से भी ज़्यादा है
ये जो मेरी तन्हाई की एक सुकून सी बनी हो आजकल
ये जो मेरी फ़ज्र की आफ़ताब और शबनम की माह बनी हो
जब तुम सुबह उठती होगी तो तुम्हारे चारों ओर गुल-ए-सर्ख हुआ करते होंगे
ये जो ग़ज़ल मैंने उतारी है तुम पर, मैंने कुछ सोच कर ही उतारी है
ये जो कहकशां बसाई हुई है तुमने अपनी सुनहरी भूरी निगाहों में
ये जो क़तरा-ए-नूर लगाती हो तुम अपने जबीं पर
ये जो काली ज़ुल्फ़ों की चांदनी है तुम्हारी
ये जो मुनव्वर गोहर-ए-गूश हैं तुम्हारे
ये जो रंग-ए-गुल होंठ हैं तुम्हारे
ये जो लतीफ़ दस्त हैं तुम्हारी
ये जो खूबसूरत साँवला रंग है तुम्हारा
ये जो मेरी रगों में तुम्हारा एक नशा सा है
ये जो मेरी तमन्ना है तुम्हें सब कुछ अपना बनाने की
जब तुम रात को सोती होगी तो तुम्हारे चारों ओर गुल-ए-सफ़ेद हुआ करते होंगे
By Chitransh Sinha

Waah, umda likhte ho aap
Mera ladka hai ye
💯💯❤️
No words left after reading this masterpiece
Kya likha hai Mashallah 🤌