उलझने।
By Himani Bhardwaj
चाहता है की भूत में जाकर काल बदल सकूँ
टूटे दिल का वो प्यार बदल सकूँ
जिस साथ का वादा किया था तूने
वर्तमान का वो साथ बदल सकूँ
बिलखती सी रह गयी है आहें मेरी
न जिन्दा, न मुर्दो में गिनती है मेरी
सांसें तो आ जा रही हैं अब भी
इसी कोशिश में की पिंजर से आज़ाद कर सकूँ कहीं
By Himani Bhardwaj

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