"उम्मीद"
Updated: Jul 16, 2025
By Maziah Shaaz
रौशनी की शाख से,
उधार लेके आए हैं
कोयलों की राख से,
शरार लेके आए हैं।
आंख की नमी से हम,
बहार लेके आए हैं
दश्त की ज़मीन पे,
फुहार लेके आए हैं।
रंजिशों के रंग से,
प्यार लेके आए हैं
नफ़रतों के तंज़ से,
ग़ुबार लेके आए हैं।
शिक्वों के हिजाब से,
निखार लेके आए हैं
धुंध की शराब से
शिकार लेके आए हैं
ये बेड़ियां, ये सरहदें,
है कांच सी ये ज़िंदगी,
हम उस जहाँ के ख्वाबों से
खुमार लेके आए हैं।
By Maziah Shaaz

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