“उम्मीद”
By Dr. Megha Soni
मन तो बहुत कुछ होता है ,
पर मन का कहाँ सब होता है ,
उजालों की उम्मीद मे ,
‘उम्मीद’ ही सबसे बड़ा धोखा है.
ख़्वाहिशों की आग जलाए ,
दिन से बरस ,
बरस से बरसों हो जाएँ,
आँखों के कोनों पर सजाये सपने ,
धीमें – धीमें मुरझाएँ ,
पर बांधे ‘उम्मीद ‘ के धागे ,
मन मेरा फिर चलता जाए .
By Dr. Megha Soni

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