उन्होंने कहा
By Keerti joshi
हमारे घर में पढ़ने के लिए
बेटियों को दूसरे शहर नहीं भेजते
मैंने मान लिया ।
उन्होंने कहा -
बेटी देर रात घर आए
मोहल्ले वाले क्या कहेंगे ?
ये नौकरी छोड़ दो ,
मैंने माँ की तरफ़ देखा
माँ ने नज़रें झुका लीं ।
मैंने माँ की
झुकी नज़रों का
कहा मान लिया ।
उन्होंने कहा -
अच्छा ख़ानदान है,
लड़का अच्छा कमाता है
और तुम उन्हें पसन्द भी हो
मैंने उनकी बात मान ली ।
उन्होंने कहा -
बड़े घरों की बहुएँ नौकरी नहीं करतीं
मैंने उनकी बात मान ली ।
उन्होंने कहा -
बार-बार मायके क्यों जाती हो ?
होली-दिवाली मिल लिया करो ।
फिर मैं उसी शहर में रहकर
माँ-पिताजी बीमार हों तब भी
फ़ोन पर ही तबीयत पूछती रही ।
उन्होंने कहा -
क्या लिखती-पढ़ती रहती हो ?
अपना ध्यान बच्चों में लगाओ
एक बार फिर
मैंने उनकी बात मान ली ।
साल दर साल वो कहते गए
बातें छोटी -बड़ी
और मैं ,
मानती गई चुपचाप ।
एक दिन उन्होंने मेरी बेटी से कहा -
हमारे घर में बेटियों को नहीं है आज़ादी
अपनी ज़िन्दगी के फ़ैसले करने की ,
मेरी बेटी ने मेरी ओर देखा -
इस बार मैंने नहीं मानी उनकी बात।
By Keerti joshi

Comments