ईश्वर का घर
By Deepali Bhatia
है कठिन डगर,
चख से हो रुधिर झर-झर,
मैं ढूँढ़ रहा हूँ दर-ब-दर,
कहाँ है सुकून का घर!
है उग्र डगर,
तप शेष प्रवर,
मैं ढूँढ़ रहा हूँ दर-ब-दर,
कहाँ है अमन का घर!
है सीमित डगर,
तुम और मैं नश्वर,
मैं ढूँढ़ रहा हूँ दर-ब-दर,
कहाँ है ईश्वर का घर!
By Deepali Bhatia

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