इस लम्हें में यही रुक जाते है
By Manasvi Varshneya
इस लम्हे में रुक जाते हैं
वक़्त को आज थोड़ा थाम लेते है,
इस इक लम्हे में जिंदगी गुज़ार देते है
पुराने ज़ख़्मों पर भी मरहम लगा देते है।
बरसों पुरानी हँसी को दोहराते है
इस लम्हे में चाय के साथ ठहाके लगाते है,
अनकहा भी कह देते है
ख़ामोशी को भी आज सुन लेते है
ख़ुशी से फ़िर पहचान कर लेते है।
इस एक लम्हें में नई जिंदगी बुन लाते है,
इस लम्हे में रुक जाते है!
By Manasvi Varshneya

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