इस भरी दुनिया में मैं खुद को
By Shriram Bharti
इस भरी दुनिया में मैं खुद को
खुदी से अज्ञात करता हूँ
बंद कमरे में नक़ाब उतार कर
अपने आप से दो बात करता हूँ
मुसाफ़िर बनने आया हूँ
मगर मंज़िल का मुझे पता नहीं है
मैं इसी तरह आसमान में आँखे
गड़ाए दिन को रात करता हूँ!
By Shriram Bharti

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