इतना आसान नहीं था यहां तक आना
Updated: Jul 16, 2025
By Vijay Dilip Patil
इतना आसान नहीं था यहां तक आना
मगर आए तो है
इतना आसान नहीं था इस भिड़ मे अपनी जगह बनाना
मगर बनाए तो है
इतना आसान नहीं था हर काम को बिना दिखावे के सादगी से निभाना
मगर निभाए तो है
इतना आसान नहीं था अल्फाजों को पिरोके गीत बनाना
मगर बनाए तो है
इतना आसान नहीं था इस मोहमाया के जंजाल में उसूलों पर टिक पाना
मगर टिक पाए तो है
इतना आसान नहीं था हर बात को आसान लफ्जों में बताना
मगर बताए तो है
इतना आसान नहीं था निराशा के बादलों में आशा के दीप जलाना
मगर जलाएं तो है
इतना आसान नहीं था हर उलझन को सहजता से सुलझा पाना
मगर धीमे-धीमे ही सही सुलझाए तो है
इतना आसान नहीं था गांव की मिट्टी से आकर शहर में घर बनाना
छोटा ही सही मगर बनाए तो है
इतना आसान नहीं था हर बार चोटिल होना
मगर चोट खाए तो है
इतना आसान नहीं था जख्मों को भर पाना
मगर मरहम लगाए तो है
अच्छा नहीं लगता महकते फूलों का बागों में मुरझा जाना
मगर मुरझाए तो है
इतना आसान नहीं था फिर से पौधे लगाना और बाग को महकाना
मगर महकाए तो है
इतना आसान नहीं था हर बार की कशमकश में उभर पाना
मगर उभर पाए तो है
इतना आसान नहीं था हर गम पर मुस्कुराना और फिर नया गम सह पाना
गमों को बेफिक्री से मगर उड़ाए तो है
इतना आसान नहीं था खोकर पाना
थोड़ा ही सही मगर पाए तो है
इतना आसान नहीं था यहां तक आना
मगर आए तो है
By Vijay Dilip Patil

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