इजहार
By Atharva Arvind Andore
कहकर भी कुछ यू ना कह सका मैं, बंधे लफ्जोंको जुबांसे छुडा ना सका मैं, ऑंखे मेरी पढ गये वो शायद उसी लम्हें में, बेवकुफी मेरी उनकी पढना भूल गया मैं! अब इंतजार है फिर मुलाकात का, उनकी रुहानियतसे रूबरु होने का, ऑंखोंसे बहोत कुछ कह दिया है हमने पहलेसे ही, अब वक्त है लफ्जोंसे इजहार करने का!
By Atharva Arvind Andore

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