इक दुनिया ऐसी दुनिया हो
- Hashtag Kalakar
- May 24, 2024
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Updated: Oct 4, 2024
By Gautam Anand
इक दुनिया ऐसी दुनिया हो जिसमें कोई बेघर न हो
हर खेत अन्न से भरा रहे कोई टुकड़ा भी बंजर न हो
खेल-खिलौने, कलम-किताबें बच्चों के हाथों में हो
खेलें-कूदें और मुस्काएँ सिर पर उनके गट्ठर न हो
हर घर में एक चूल्हा हो चूल्हे में थोड़ी आग भी हो
भरी हुई हर थाली हो माँ के मन पर पत्थर न हो
बगिया की तरह हर घर महके फूलों जैसे लोग खिलें
घर में प्रीत की ख़ुशबू हो दुःख का कोई भी स्वर न हो
स्त्री भी उन्मुक्त रहे पुरुषों में करुणा का भाव रहे
चिड़ियों की तरह बेटी चहके मन में कोई भी डर न हो
By Gautam Anand

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