इंसानियत
- Hashtag Kalakar
- Dec 8, 2025
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By Rohit 'Lukad' Jain
धर्म, मज़हब, जात के जाल में मत फँस जाना,
पहले इंसान बनना, फिर कुछ और बन जाना,
इंसानियत ही है जो रब तक ले जाती है,
सिर्फ मंदिर-मस्जिद तक जाकर मत रह जाना ।।
इंसान बनो तो ऐसा बनो कि ज़माना अपने नाम लिख लेना,
ज़ख़्म खाकर भी मुस्कुरा दो, यही सबको सीखा जाना,
नफ़रतों से दुनिया जल रही है हर तरफ़, थोड़ा प्यार बाँट देना,
शायद यहीं सुकून हल दे, और तुम दुनिया अपना बना जाना ।।
कभी किसी की आँखों में वजह बेवजह आँसू न लाना,
कोई अपना हो या दुश्मन हो उसका दिल न दुखाना,
ज़िन्दगी बहुत ही छोटी और अचरज भरी हैं जिसमे,
इंसानियत से बढ़कर और कोई मजहब नहीं अपनाना ।।
By Rohit 'Lukad' Jain

बहुत अच्छी बात हैं
Wow awesome
Wow awesome
Beautiful words penned with pure heart
Very true