इंसान
By Surabhi
ख़ुदा तूने ये जो इंसान बना दिया
इसने तुझसे नया भगवन बना दिया
तेरे नाम पर मज़हब बना दिया
मज़हब की बंदिशों में तुझे ही भुला दिया
अपने पराए में फ़र्क़ हो गया
जब हासील करना मक़सद हो गया
विश्वास करना मुश्किल हो गया
तेरे जहां से इंसानियत का विनाश हो गया
तेरी इबादत पर भी सवाल उठ रहे हैं
बन्दे तेरे मारे- मारे भटक रहे हैं
मांजिल कहीं है कहीं और जा रहे हैं
अंधेरो में जा रौशनी तलाश रहे हैं
By Surabhi

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