इंतज़ार
By Zaakal (Tushar)
मंज़िल रुकी है,
रास्ता नाराज़ है,
ज़िंदगी तो बस-
एक लम्बा इंतज़ार हैं ।
जब आये यहाँ
बाटी यादें हज़ार में,
जायेंगे जब-
छोड़नी बेसुमार है,
शुबह के तोहफे -
शाम को उधार है ।
O ज़िंदगी तो बस…
किनारो का सफर,
पानी का मंज़र,
लहरों के मुन्तज़िर,
बादबान के शुक्रगुज़ार है,
रुकी कश्ती नाकाम -
तैरना कारोबार है।
O ज़िंदगी तो बस…
दोस्त की नज़र,
प्यार की तड़प
मस्ती ओ के किस्से -
यादो के पिटारे,
पाया यहाँ जो-
खोना आखिरकार है,
बीतें कल के मालिक-
आज के गुलाम हैं।
ज़िंदगी तो बस -
एक लम्बा इंतज़ार हैं ।
By Zaakal (Tushar)

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