आस्था
By Anupama Bage
अनास्था ने पूछा आस्था से,
ऐ आस्था मुझे बता
किसने बनाया है ये जहान
नज़र नहीं आता मुझे कोई भगवान
अगर है कोई,
तो दिखा मुझे उसका अस्तित्व
कहाँ है हाथ, कहाँ है पांव
क्या है उसमें कोई जान?
जो है कोई भगवान
तो क्यों दर्द में जी रहा इंसान
ठंडा हो गया है, आपस का प्यार
रिश्ते हो गए हैं तार - तार
क्यों यहां हर कोई अकेला
क्या वो ये नहीं है देखता?
भूख से न कोई यहां तड़पता
उसने जो झोली भर दिया होता
अब बता करूं मैं कैसे विश्वास
कि आसमान में बैठा है कोई खास
कैसे लूं मैं ये मान
की जहां में है कोई भगवान
आस्था बोली , अब तू ये मुझे बता
तूने कहा, किस ने बनाया है ये जहान
अगर नहीं है बनाया किसी ने
तो किस के हाथों में है इसकी कमान
क्यों है होते
दिन और रात
किस ने बांटा है ये इनका समय
किस की मानते हैं ये बात
तू कहती है, यहां है दुख दर्द
दुनिया है रोती
मैं पूछती हूं ,देखा है तूने कभी
किसी धर्मी को मांगते हुए रोटी
जो नहीं है कोई खुदा
तो तुझे जिंदगी किस ने दी , ये बता
एक बार तो उसे पुकार
यकीन मान , तेरे दामन में भर देगा वो प्यार
उस के अस्तित्व का बखान
कर रही है तेरी हर सांस
भगवान है, और रहेगा
ये है मेरी आस्था , मेरा विश्वास।
By Anupama Bage

Comments