आशा की किरण
- Hashtag Kalakar
- Dec 10, 2025
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By Umang Agarwal
गर्मियों की इस चिलचिलाती दुपहरी में
पत्थर कूटते ये मज़बूत हाथ
और माथे पर छलक आयीं
पसीने की बूँदें
इनको देख, मन द्रवित हो उठता है
मानों अपने मज़बूत हाथों से –
पत्थर नहीं, वरन् अपना भाग्य
कूट रहे हैं ये लोग
मन में आशा की किरण लिए
कि शायद कहीं
पत्थर के किसी टुकड़े के भीतर
इनकी ख़ुशियाँ बंद हों
इनके सपने क़ैद हों
और शायद इसी तरह पत्थर कूटते – कूटते
कभी अचानक
ख़ुशियों से इनकी मुलाक़ात हो जाये
और ये अपने सपनों को
समय की क़ैद से आज़ाद करा सकें।
By Umang Agarwal

Very hopeful message
Very well written!
Very well written!
Love this one!
Important to keep hoping