आवारा ख्वाब!
By Prathamesh Samant
आवार ख़्वाबों को कहिये,
थोडासा ठहर जेएं...
जरा उनसे कहिये,
हमे मभी थोडा आजमाएं...
सर्द आहों से गुजारा
करना मुश्किल है...
उनसे कहिये हमसे,
एहसासों की थोड़ी गर्माहट ले जेएं...
कुछ दौर हमने भी देखे हैं,
कुछ सिलसिलें हमने भी जोड़े हैं...
कहियेगा उनसे थोडा हमसे सुने,
कुछ किस्से हमे भी सुनाएं...
इन दिनों दूर तक सुखा
पड़ा है...
जरा कहिये उनसे पलकों से थोड़ी
नामी सांग ले जाएं...
कहते हैं कल किसने देखा है,
ख़्वाबों को शायद सब पता है...
कहियेगा उनसे हमें ठगले चाहे,
बदले में मुक़द्दर की पहेली सुलझाएं...
By Prathamesh Samant

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