आवाज़ अंतर मन की
By Niramay Pandey
मुँह की बात सुने हर कोई
दिल के दर्द जाने कौन
आवाजों के बाजारों में
खामोशी पहचाने कौन
हरकतें बेतुकी सभी दिखती है
मगर उनके पीछे का कारण पूछे कौन
मैं हु खुद से बोलता दूसरों पे आश्रित नहीं
न जाने मुझ में ही कहा छुपा बैठा है
मुझ जैसा ही कौन
इशारों की भाषा में
मन की बात सुने कौन
सदियों सदियों वही तमाशा
रस्ता रस्ता लम्बी खोज
जो अगर हम मिले तो
लगे जैसे बिछड़ जायेगा कौन
दुनियाँ की रीत कह कर
और शर्तों में बांध कर
न जाने जिंदगी जीए है कौन
By Niramay Pandey

कुछ कविताएँ पढ़ी नहीं जातीं, महसूस की जाती हैं
यह उन्हीं में से एक है।
Good