आपकी तस्वीर
By Dushyant Singh Sisodia
मुक़म्मल तो इश्क़ इस जनम हमारा, मगर कुछ अधूरासा छोड़ गए।
अगले ही पल आप हमसे अजनबी से बन गए,
और यह भी काफ़ी नहीं था जो आप अजनबियों में अपनी तस्वीर छोड़ गए।
हम भी ज़िद में आपकी जगह आपकी तस्वीर समेटने में रह गए।
By Dushyant Singh Sisodia

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