आत्मदर्शन
- Hashtag Kalakar
- Nov 30, 2025
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By Anu Radha
जिंदगी की जुस्तजू किसे नहीं होती, कब नहीं होती, हर एक इंसान जीने की ख्वाहिश रखता है। यह तो अलग बात है कि कोई जी भर के जिंदगी का मजा लेता है। तो कोई तमाम उम्र को बस किस्तों में ही जी लेता है । कहने के लिए जिंदगी इंसान को बहुत कुछ सिखाती है पर साथ साथ छीन भी तो जाती है बहुत कुछ। चार पल की कही जाने वाली जिंदगी किसी इंसान के लिए चार सदियों से भी लंबी हो जाती है। जिंदगी में कब क्या को जाए ,क्या छीन जाए ,कौन बिछड़ जाए ,क्या मालूम। दुनिया का सिलसिला तो है खोना और पाना । पर इंसान खोने की बजाय पाना ज़्यादा जरूरी समझता है । यह जानते हुए कि इसे रुखसत करोगे, तो कुछ भी साथ न जाएगा फिर भी भागते रहे पाने की खातिर।
आज बात करते हैं एक ऐसे ही लड़के की। एक छोटे से गांव में पैदा और पला बड़ा अश्विनी आज 22 सालों का हो गया। पता ही नहीं चला कि कब वह अपनी उम्र के उस दौर में आ पहुंचा जहां पर अपनी जिंदगी के फैसलों को लेने का वक्त होता है ।क्या वह इस फैसले को ले सकेगा क्या उसे किसी की मदद मिलेगी क्या उसके सपने साकार होंगे क्या उसने जो सोचा है कर पाएगा यह सब सवाल उसकी जिंदगी में केवल अभी ही नहीं बल्कि कई बार ,बार
• बार आए कभी वह हार गया कभी जीत बना ली।
पर शायद अब वह थका थका सा लगता था ।वह अश्विनी जो जिंदगी के हर पल में दिलचस्पी लेता था महफिलों से दूर तन्हाइयों का मेहमान हो गया। जिंदगी के फैसलों से उखड़ा -उखड़ा जाने किन सोचों मैं गुम रहता था। ऐसा क्या था उसकी जिंदगी में जो उसे इस तरह जिनझोड़ड़कर चला गया और क्यों।
यूं तो अश्विनी एक छोटे से परिवार में पैदा हुआ ,अच्छी कद काठी वाला युवक था। पढ़ाई में भी बहुत अच्छा था। बस पढ़ाई का बहुत शोक था उसे।
गांव की जिंदगी वैसे भी मुश्किल होती है, पर उसने कभी भी शहर से वहां की चमक-दमक से लगाऊ नहीं रखा। पढ़ने के लिए शहर जाना चाहता था। पढ़ाई से विशेष लगाव था उसे अश्विनी को बस किसी तरह से विश्वविद्यालय के पढ़ाई करना था ।जैसे तैसे उसने विश्वविद्यालय में दाखिला ले लिया। हॉस्टल में रहने लगा पर वहां पर उससे मन नहीं लगा। पैसे का भी अभाव रहने लगा आर्थिक परिस्थितियों के कारण हॉस्टल छोड़कर किराए के मकान में रहने लगा। कुछ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। जिससे कुछ कमा भी लेता था और अपनी पढ़ाई भी जारी रख सकता था। जीवन का महत्व उसके लिए बहुत था ।वह हर तरह से जिंदगी की परीक्षा में पास होना चाहता था। वह एक संपूर्ण जीवन जीना चाहता था ।अपने स्वभाव की वजह से अश्विनी के ज्यादा दोस्त नहीं थे। उसको लड़कपन जैसी हरकतें पसंद नहीं थी ,और उसके दोस्तों में सुशील युवक ही थे। अश्विनी को तलाश थी एक ऐसे ही एक ऐसे दोस्त की जो उसे समझ सके ।जिसे अपनी बात समझा सके। उसकी यह इच्छा पूरी न हो सकी। पढ़ाई ने इसके बारे में सोचने का वक्त नहीं दिया।
पढ़ाई के दौरान अश्विनी को कई बुरी परिस्थितियों से गुजरना पड़ा जिससे वह अपनी पढ़ाई भविष्य की तरफ ही ध्यान लगा बैठा। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह चाहता था। कि कोई नौकरी करें पर वह घर वापस आ गया। तो घर की परिस्थितियों की वजह से उसे अपने सपनों को तोड़ना पड़ा। लाचार सा वह ज़िंदगी की उथल-पुथल में खो गया।
कई बार जिंदगी में ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं जिससे इंसान टूट जाता है बिखर जाता है। पर सब सपने साकार तो नहीं होते। जिंदगी सबको कुछ ना कुछ देती है कुछ ना कुछ नया सिखाती है ।अश्विनी को भी जिंदगी ने बहुत कुछ दिया। पर यह भी तो तय था कि जिंदगी में सब कुछ अपने हिसाब से तो नहीं मिलता।
By Anu Radha

Nice composition
Great work
Nice maam
Its great work
Bahut badiya. Atam darshan man ka nhi jewan ki paristhitiyon ko bhi darshata hai