आजकल कविताओं में लड़की
By Abha Vishwakarma
आजकल कविताओं में लड़की के
रंगबिरंगे इन्द्रध्नुषी सपनों का संसार नहीं होता
वह कल्पनाओं की ऊँची उड़ाने नहीं भरती
’ज़िन्दगी’ का सामना करती है लड़की
कविताओं में ।
उसकी कवितओं में होते हैं
बूढ़े विवश पिता
बीमार माँ
छोटे -छोटे भाई बहन
और
कभी न खत्म होने वाले
अननिनत सवाल ।
कविताओं में होता है
लड़की का दफ़्तर
और नौ से पाँच के दरम्याँ
काम करने वाली लड़की की
हैरानियाँ और परेशानियाँ ।
कभी -कभी
उसकी कविताओं में होता है
एक दोस्त
जिसके साथ
आत्ममियता के कुछ क्षण
गुज़ार लेती है वह
यह जानते हुए भी
कि बहुत दूर नहीं चल सकती है
वह उसके साथ ।
लेकिन आजकल अक्सर
उदासी, तनहाई, दर्द और खामोशी
होती है लड़की की
कवितावों में I
By Abha Vishwakarma

Very nice
Ati sundar
Very nice poem
Your work is a remarkable celebration of women,articulated with sensitivity and poetic brilliance.
Congratulations 🎊
A very realistic picture of today's women!