आज बारिशें आईं हैं मेरे शहर में
Updated: Jul 15, 2025
By Jaya Bhardwaj
आज बारिशें आईं हैं मेरे शहर में।
तो उनका यूं आ जाना कुछ लाज़मी सा था।
धरती की इतनी तपन देखकर,
आसमान का यूं बरस जाना कुछ लाज़मी सा था।
माना कि वो मुखा़तिब तो नहीं मेरे जज़्बातों से,
मग़र उनका मेरे ख़यालों में आना तो कुछ लाज़मी सा था।
और इन बारिश की बूंदों में मुझे उनका नज़र आ जाना कुछ लाज़मी सा था।
यक़ीनन वो रूबरू ही नहीं मेरे जज़्बातों से,
वरना इतनी बारिशों में उनके दिल का पिघल जाना
और लौट आना, कुछ लाज़मी सा था ।
ख़ैर, अब जो बारिशें आईं हैं मेरे शहर में
इतने बरस बाद।
तो मन का खिल जाना भी लाज़मी सा था ।
और आंखों का भर आना भी लाज़मी सा था।
By Jaya Bhardwaj

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