आओ इस भू- लोक का चक्कर लगाएं।
Updated: Jul 12, 2025
By Surjeet Prajapati
आओ इस भू-लोक चक्कर लगाएं,
शीर्ष के स्थल को खोजें, और खोजे कन्दराएँ।
आओ इस भारत की भू की,
नव्य खोजेंगे दशाएँ,
नव्य खोजेंगे दिशाएँ,
आओ इस भू- लोक का चक्कर लगाएँ।
आओ खोजेंगे वो गलियारा,
जिसपे कोई न चला हो,
आओ खोजेंगे वो चिन्तक,
जिससे कोई न मिला हो,
आओ खोजेंगे उन नीरों की नदियां,
जिसके जल का न किसी को अब भी पता हो,
जो भी होगा 'नवीन’ भारत के लिए,
आओ हम लेकर के आये,
आओ पुराने नीड़ की नीवों के ऊपर,
इक नए नीड़ का निर्माण कर लें
आओ ‘नवीन भारत’ का फिर निर्माण कर लें,
आओ नवीन इस शरीर की नवीन नाड़ियों में,
इक ‘नवीन भारत’ का फिर संचार कर लें,
जब बने 'नवीन भारत’ की धरा को,
तकलीफों का भार हम सहने न देंगे,
आओ इस नवीन संकल्प को,
अपने हृदय में बसाएँ,
आओ इस भू-लोक का चक्कर लगाएँ।
जिन पुरानी भृष्टताओं में जकड़ा है भारत,
भ्रष्टताओं की उन जंजीरों को तोड़ें,
जिन लक्ष्यों को न हासिल अभी तक किया,
उनको हांसिल करें पग हम बढाएँ,
‘भव्य भारत’ की धरा के बिखरे अणुओं की,
आओ एकता कराएँ,
भव्य इस ‘भारत’ के नवल निर्माण को,
आओ हम सब साथ आएँ,
आओ इस भू-लोक का चक्कर लगाएँ।।
By Surjeet Prajapati

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