आईने के सवाल
By Dr. Monis Rizwan
चेहरे पढ़ने का हुनर सीखा, सोचा दुनिया को आज आज़माएँगे,
ज़माने की असलियत को आज हम आईना दिखाएँगे।
हमारा ये ख़याल सुना तो आईना भी हँस पड़ा,
बोला — न जाने एक चेहरे पे कितने चेहरे लगा बैठे हैं लोग।
अपनी सच्चाई को एक सवाल बना बैठे हैं लोग।
ये बदलते चेहरे देख तो मैं भी हैरान हो जाता हूँ,
अपनी आवाज़ पे ख़ुद ही सवाल हो जाता हूँ।
आप ज़माने की इस गुत्थी को सुलझाएँगे कैसे?
हज़ारों इन अस्कों में असलियत को पहचान पाएँगे कैसे?
By Dr. Monis Rizwan

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