अलविदा अंधेर
By Navneet Gill (नवनीत गिल)
ढलता सूरज देकर संदेश,
नई सुबह को करके आदेश।
कर "महताब" को नियुक्त,
होता धीरे-धीरे फिर विलुप्त।
असंख्य उम्मीदों के संग,
रोशनी की बैठक कर भंग।
अंधेरे को अंकित करता,
छिपकर, भी पहरा है देता।
बरसों का, ये ही चलन,
सृष्टि करती जिसको नमन।
एक दूजे के पूरक मगर,
सौम्य चाँद उष्णीय दिनकर।
जगत के दोनों कर्णधार,
आसमां में खेवते पतवार।
भुला करके सेर सवासेर,
कहो बस अलविदा अंधेर।
By Navneet Gill (नवनीत गिल)

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