अमन की राह
Updated: Oct 10, 2022
By Devishi Mathur
तोड़ सरहदों की दीवारें
अमन की राह चलें..
भूल कर बीती बातों को
खुश ज़मी का इंसान बन जाये
नई किताब का कोरा पन्ना बन
अपनी कोई पहचान बन जाये
तोड़ सरहदों की दीवारें
अमन की राह चलें..
भूल कर तलवार सजी रातों को
मखमली उजाले की सुबह बन जायें
रोती हुई रातों को फुसलाकर
सुनहरी एक मुस्कान बन जायें
तोड़ सरहदों की दीवारें
अमन की राह चलें..
भूल कर ज़िन्दगी की तपिश को
खुली हवाओं का झोंका बन जायें
मिटा कर दिलों की सरहदें अब
चैन ओ अमन की राह बन जायें
तोड़ सरहदों की दीवारें
अमन की राह चलें..
भूल कर अंधेरे वाली सिसकियों को
बहते अश्को का बांध बन जायें
सुनहरी किरणों को कर मुट्ठी में
सपनों का जहाँ रौशन कर जायें
तोड़ सरहदों की दीवारें
अमन की राह चलें..
By Devishi Mathur

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