अभी व्यस्त हूं
By Saksham Raj
अभी न आओ मेरे क़रीब के मैं एक काम कर रहा हूं
हो रहा था अच्छा सो अब ख़ुद को बदनाम कर रहा हूं
जुर्म क्या? जुर्माना क्या? ये इल्म अब मुझे कहां?
जो दुनिया कहे खता वो खता अब सरेआम कर रहा हूं
हर किसी से भागा जाता हूं दूर कहीं मैं आजकल
हर किसी से भागना अब किस्मत-ए-मुक़ाम कर रहा हूं
यूं बेमतलबी सी छाई है मुझ पर कुछ दिनों से यहां
फिर चाहे दोस्त हो या दुश्मन सब को सलाम कर रहा हूं
ताने सुनते सुनते सबके उभ रहा था बहुत
सो अब कान बंद किए जाके कहीं आराम कर रहा हूं
लोग भला बुरा कहने लगे हैं फिर पीठ पीछे 'क़ाबिल'
उनकी ग़ीबतों को अपने किरदार का निज़ाम कर रहा हूं
By Saksham Raj

Beautiful!
Beautiful!
What a lovely poetry😭🤌🏻
This is genuinely beautiful 🥹
Nice