अब रिटायरमेंट चाहिए
By Abhishek Sharma
यार इतना लिख दिया हैं कविताओं में तुम्हें
कि अब रिटायरमेंट चाहिए
सोचते-सोचते थक गया हूं तुमको, अब सोचता हूं
थोड़ा विश्राम चाहिए
बाल काले सुनहरे गुन्गराले जिसके है, चांदनी सी आभा उसकी
कृष्ण को भी प्रियतम राधा जी ही चाहिए
राधा जैसी छवियाँ देखता हूँ उसमें मैं
कृष्ण तोह नहीं मैं पर मुझे भी वोह चाहिए
आत्मा में बसी है वोह, देह अभी मेरा है
आत्मा मोती है देह रूपी माला में पिरोने वाला चाहिए
मेरे और मेरे मन के बीच छिड़ी महाभारत है
जीतने के लिए तोह, अर्जुन का सारथी मुझे भी अब चाहिए
जवानी में तोह नहीं मिला उसका साथ, पर अब बुढ़ापे की एक ओर आश है , निकले जब आखरी सांस मेरा, तो
सर उसकी गोदी में होना चाहिए
यार इतना लिख दिया है कविताओं में तुम्हें
की अब मुझे भी रिटायरमेंट चाहिए।
By Abhishek Sharma

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