अब मैं नहीं करती हु शिकायतें
By Nisha Dudi
अब मैं नहीं करती हु शिकायतें
कि कोई मुझे समझता नहीं
या कोई मुझे सुनता नहीं
पर दिल को जब भी ऐसा महसूस होता है .....!!
तो देख लेती हूं खुले आसमान की ओर
देखती हूं पेड़ो के पत्तों को
टहनियों को
फूलों को ....!!
जो धूप-छांव
आंधी-तूफ़ान में भी मुस्कुराते रहते है
और अपनी तमाम
खाली पड़ी, नोटबुक्स को
ओर उनके कोरे पन्नो को
जोकि थोड़ी ही देर में
भर जायेंगे,
मेरी भावनाओं से , शब्दों से
बिना कुछ बोले
चुपचाप सुनते रहेंगे मुझे
ओर सोचती हूं...!!
क्या ये भी किसी से शिकायतें करते है
आपने भीतर इतना कुछ समेट कर
कि इन्हें कोई समझता नहीं ....
ओर मुस्कुरा देती हुं
ओर हो जाते है मेरी तमाम शिकायतें
गायब हवाओ में
क्योंकि फिर अच्छा नहीं लगता
ये कहना कि कोई
मुझे समझता नहीं....।।
By Nisha Dudi

Comments