अब मुश्किल हो रहा है…
By Himani Bhardwaj
रुकते नहीं है अब अश्क़ मेरी आँखों से
ज़माने से छुपाना मुश्किल हो रहा है
मुस्कराहट के पीछे जो दास्ताँ है मेरी
वो बयां करना मुश्किल हो रहा है
समेट लेती हूँ खुदको लफ्ज़ो में अब
की ख्वाबो का फलसफा छुपाना मुश्किल हो रहा है
ख्वाहिश ये की घडी आये अंतिम और चल बसू मैं
के अब पल -पल सांसें लेना मुश्किल हो रहा है
By Himani Bhardwaj

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