अब तुम नही
By Rajat Shankhdhar
मैं ठहरा, वक्त ठहरा, पर अब ठहरे तुम नहीं,
तसव्वुर में है आरजू, पर अब आरजू मैं तुम नहीं,
मैं घिसूं स्याही पन्ने पे, या कोरा यूं छोड़ दूं,
हकदार मैं अपने शब्दों का, उन शब्दों में अब तुम नहीं,
थी हकीकत तू मेरी, हसीन भी तो तू कम नहीं,
मदहोश हजारो होंगे तुझ पर, अब उन हजारो में मैं नहीं,
ख्याल तेरा , साथ तेरा, वक्त भी वो था हसीन,
वक्त की ही चोट है इस वक्त पे वो वक्त नहीं,
जिक्र तेरे तिलो का था, जिक्र अब तिल भर भी नहीं,
ये चार आंखें दो दिलो की कहानी मैं अब शामिल नहीं,
आखें समुंदर, चहरा रूहानी, जुल्फे छाव, होठों पे कहानी,
ये खत्म सफर मोहब्बत का, खुद पर अब कोई घाव नहीं,
मुसाफिर चलता अपनी राह पे, पाने की तुझे ख्वाइश नहीं,
जिस्मों का कोई शौक नहीं, पर अब रूह की भी कोई बात नहीं ।।
By Rajat Shankhdhar

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