अपने-अपने युद्ध
By Tulsi Chhetry
हमारा साथ होना सबसे जरूरी था
हम लड़ रहे थे अनवरत युद्ध,
बंकरों की खोह से
उजले से स्याह होते चांद को देखते हुए
हमें नींद ने नहीं टोका
हमारी सड़कों के किनारे
नहीं उगे देवदार, पलाश
पर उग-उग आते रहे नाखून
धुएं और धूल से धूसरित
कत्थई होता गया आकाश
इस युद्ध की समाप्ति पर
सूखी दूब को हरियाना था
गन्नों की गोलाई को बढ़ जाना था
नाखूनों के काटे जाने पर
पलाश को उग आना था
तुम्हारे सीने के कत्थई आकाश पर
मुझे बूंद बन जाना था
बस इसलिए भी
हमारा साथ होना सबसे जरूरी था।
By Tulsi Chhetry

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