"अनंत शिव"
By Dr. Susheela Chaurasia
जिनका कोई आदी है,
ना जिनका कोई अंत है,
वो मेरे शिव हैं, वो मेरे अनंत हैं।
जिनके सर पर हैं चंद्रमा और गले में वासुकि सर्प हैं,
वो मेरे शंकर, वो मेरे अनंत हैं।
जिनके माथे पर तीसरी आंख और गले में रुद्र कंठ हैं,
वो मेरे भोले, वो मेरे महेश्वर हैं।
जिनके बगल में कार्तिके,
और गोद में गणपति भगवन है,
वो मेरे शिव हैं, वो मेरे अनंत हैं।
जिनकी जटाओं से बह रही हैं गंगा माता,
जिनके हृदय में पार्वती माता और सती हर एक पल हैं,
जिसने विष पीके बनाया, खुद को नीलकंठ है,
वो मेरे जगत पिता हैं, वो मेरे रुद्रेश्वर हैं।
जिनका भस्म में रमा तन बदन है,
जिनके त्रिशूल और डमरू की आवाज कण कण है,
जिनके साथ नंदी गाय और पूरा शिव गण हैं,
जिनके सहयोगी हैं, लक्ष्मी, सरस्वती, ब्रह्मा और नारायण हैं,
वो मेरे भोले, वो मेरे भगवन हैं।
जिनकी तीसरी आंख जो खुल जाए,
तो प्रलय आ जाए,
जो गर प्रसन्न है, तो सुनहरा ही सुनहरा हर एक पल है,
वो मेरे शिव हैं, वो मेरे ईश्वर हैं,
जिनका कोई आदी है, ना जिनका कोई अंत है।
By Dr. Susheela Chaurasia

Amazingly written🧿✨
Very nicely written, excellent
Very nicely written with deep thoughts
Very nicely written with deep thoughts 🙏
Excellent poem