अनंत परीक्षाएँ
By Kapil Chugh
परीक्षाओं का कभी अंत नहीं होता
हर परिणाम तुरंत नहीं होता
आसमान कितना भी असीमित हो
पक्षी का विचरण अनंत नहीं होता।
अनिर्णय जब निर्णय हो जाए
रुके रहना वरणीय हो जाए
सोचो तालाब से नदी कब बनी?
सागर से जिसका परिणय हो जाए।
गंतव्य में रास्तों का द्वंद हो
हर द्वार लगे कि जैसे बंद हो
आंखें बंद कर अपनी आंखें खोल
चुन ले राह जो तुझे पसंद हो।
रोकेंगे तुम्हें बहुत यह कहने वाले
समझाएंगे बातें तुमसे जलने वाले
जब निर्णय कर ही लिया तुमने
समझा दो उन्हें-‘हम नहीं टलने वाले’
समझा दो उन्हें-‘हम नहीं टलने वाले’
By Kapil Chugh

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