अजन्मे बेटी की आवाज़
By Mr. Anil kumar mandal
जग में आने से पहले सताई गई,
कोख में टेटूवे को दबाई गई। २
मुझको मेरी खता का पता ही नहीं,
कैचिया मेरे ऊपर चलाई गई।
जग ने कहकर के अबला पुकारा मुझे,
बोझ माना गटर में बहाई गई।
मैं तो बेटी थी मुझमेँ सृजन थी बसी,
कुल का दीपक न थी सो बुझाई गई।
मेरे लोहित ही जब मेरे क़ातिल बने,
झूठी शौहरत में ये सब कराई गई।
लड़के उद्धार करते हैं एक कुल का,
मैं थी दो कुल की खुशबू मिटाई गई।
जग में आने से पहले सताई गई,
कोख में टेटूवे को दबाई गई।
By Mr. Anil kumar mandal

Comments