अच्छी नहीं लगती हूँ मै
By Sunanda Rana
बुरी नही हूं मैं,
बस किसी को अच्छी नहीं लगती।
झूठी नहीं हूं मैं,
बस किसी को सच्ची नहीं लगती।
दूर नहीं हूं मैं,
बस पास किसी को अच्छी नहीं लगती।
रोती नहीं हूं मैं,
बस हंसी किसी को अच्छी नहीं लगती।
उदास नहीं हूं मैं
बस खुश किसी को अच्छी नहीं लगती।
वजूद में कम नहीं हूं मैं,
बस हस्ती किसी को अच्छी नहीं लगती।
बुरी नही हूं मैं,
बस किसी को अच्छी नहीं लगती।
By Sunanda Rana

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