अगर तेरी यादें भी चली जाति
By Anuja
अगर तेरी यादें भी चली जाति
जितनी आसानी से तुम गए थे
तो रात को गले लगा कर
फिरसे नींद से इश्क़ कर बैठते ।
अगर आंसुओं को मुस्कुराहट में बदल सकते
जितनी तेज़ी से तुमने रंग बदले थे
तो खामोशी से रिश्ता तोड़ कर
आँखों से एक नयी दास्तान लिखते ।
By Anuja

Comments