अगर कभी मौका मिले लिखने का
By Akansha Ashok
रास्ते पर चलते-चलते थक जाओ, तो मेरा हाथ थाम लेना,
अगर इस बेहुदी दुनिया में तन्हा महसूस करो, तो मुझे याद कर लेना।
अगर कभी शहरी शाम गुज़ारो, तो मेरे पुराने ग़ज़ल पढ़ लेना,
अगर कभी मौका मिले लिखने का, तो मेरी यह अधूरी ग़ज़ल पूरी कर देना।
By Akansha Ashok

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