अकेला घर
By Shefali Agarwal
करता रहता हूँ इंतज़ार तुम्हारा,
कि तुम आकर मुझे सँवारोगे,
चहकेगा मेरा ये सूना अँगना,
जब कुछ रोज़ तुम यहाँ गुज़ारोगे ।
आते हो तुम, तो दरवाज़े पर,
रोज़ गैया भी मिलने आती है,
मैं भी गुमसुम हो जाता हूँ जब,
वो तुम्हें न पा, सहम सी जाती है ।
आते हो मेहमानों जैसे,
ये वक्त तुरंत गुज़र जाता है,
रह जाऊँगा फिर अकेला,
यह सोच मन घबरा जाता है ।
कब आओगे अब अगली दफ़ा,
मेरी हर ईंट यही रट लगा रही,
जवाब क्या दोगे अब तुम,
मालूम मुझे, तुम्हारी चुप्पी ही सब बता रही !
By Shefali Agarwal

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