अकेला
By Harit Dudharejiya
मैं और ये चांद , दोनो ही अकेले हैं।
देखते है इस जहां को, यहां लगे लोगो के मेले है।
लोगो के इस मेले में,
लगते जज्बातों के ढेले है।
इन जज्बातों के ढेले में,
होते इंसान मैले है।
जो इंसान होते मैले है,
उनके ही होते चेले है।
जो दिल के साफ होते है,
वो रहते अक्सर अकेले हैं।
मैं और ये चांद, दोनो ही अकेले हैं।
देखते है इस जहां को, यहां लगे लोगो के मेले है।
By Harit Dudharejiya

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