Zindagi Ka Kissa
Updated: Jul 8, 2025
By Sakshi Saxena
वक्त चलता ही जाता है
तज़ुर्बे नए देता ही जाता है
दिन बदलते हैं, महीने बदलते हैं, साले बीत जाती हैं
बरसों पुराने झखम भर जाते हैं
वादें पुराने झूठे हो जाते हैं
कुछ कहानियां मुकम्मल तो कुछ अधूरी रह जाती हैं
कहीं दर्द होता है तो कहीं महफिल सजती है
यादें पुरानी धुंधली हो जाती हैं
इस वक्त की रफ़्तार ने कितना कुछ बदला है
कहीं आसूं है तो कहीं हसी
कहीं गम है तो कहीं खुशी
ये जो खुशी है ये जो दर्द है वक्त ने सबको ही बांटे हैं
थोड़ा हम हैं इनका हिस्सा
थोड़ा आप हो इनका हिस्सा
बस यही तो है ज़िंदगी का किस्सा...
By Sakshi Saxena

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