Zindagi Ka Khel
By Abhay Kr. Gaur
जज्बे और हौसले का ही तो खेल है सारा
मायूस मत भटक तू बेचैन मारा मारा
सब्र के इम्तेहान अभी और भी हैं बाकी
औरों से हमदर्दी की बेजा उम्मीद है नाकाफी
हर कदम पर मिल सकती है तुझे ठोकर
हार मत मानना अपना सब कुछ खोकर
आगे बढ़ने वालों को ही फिसलने का डर है
रोने वालों के लिए तो मुश्किल हर सफर है
करता रह ज़िंदगी से इश्क़ हो के खुद में मस्त
तुझे गिराने वालों के मंसूबे होते रहेंगे यूहीं पस्त
By Abhay Kr. Gaur

Bahut sundar
Great job
Good job
Best
Good Poem