Yeh manushya jeeven kaisa hai
By Priya Jain
ये मनुष्य जीवन कैसा है….
ये मानुष जीवन हैममला हैबडे भाग्य से ना जाने दो इसे व्यर्थ !!१!!
है ये कीमती हीरे के तरह, ककया जा सकता है इसका उपयोग, हीरे के हार की तरह.
इस जीवन की चमक है चाांद की तरह, जो रोशन कर सकता हैइस जहाां को अपनी सांतान की तरह.!!२!!
है ये जीवन एक रीखा की तरह जजसकी है सीमा, मनुष्य दौडता चला जाता है इस रेखा मेंऔर पहुांच जाता हैसीमा के आांत में!!३!!
इस जीवन में बस रोटी, कपडा और मकान के पीछे भागता है मनुष्य, और भागते ही भागते दम तोड देता हैमनुष्य !!४!!
सुबह पलना , साम अर्ी ,रात खटटया, तीन लकडी टूडता हैमनुष्य, ऐसा करते करते टदन काटता है मनुष्य !!५!!
इस जीवन में मनुष्य बनाता हैररश्ते अनेक पर ले ना जाता अपने सांग एक,
पाता तो है नाम, दौलत, और शोहरत पर छोड जाता हैअपनों के टदल में यादेंऔर खूबसूरत बबताए हुए पल!!६!!
इस जीवन का कुछ करते हैउपयोग तो कुछ करते हैइसे ब्यार्थ, कुछ बबताते हैइसे प्यार, खुशी और दआु यो के सांग,तो कुछ बबताते है ईशा नफरत और क्रोध में मग्न!!७!!
ये मनुष्य जीवन ऐसा है,
ये मनुष्य जीवन ऐसा है,
जीलो इसको भरपूर्थ ले लो इसका स्वाद!!८!!
By Priya Jain

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