year2020
By Noorussaba Shayan
ये साल नही था आसाइश का
ये साल तो था आज़माइश का
शहर डूबे थे अंधेरों में
लोग फंसे थे वीरानों में
कितने ही अपने बिछड़ गए
कितने ही घर उजड़ गए
फिर भी हिम्मत कब हारे हैं
सब एक दूसरे के सहारे हैं
हाथ भले न मिलाये हैं
पर हाथ सब ने बढ़ाये हैं
निज़ामे ज़र डगमगाई तो क्या
इंसानियत तो जगमगाई है
मंदिर मस्जिद बंद तो क्या
ग़रीबों की दुआएं कमाई हैं
सब से दूर हुए तो क्या
अपनों के क़रीब आये हैं
सपने पीछे छूट गए तो क्या
उम्मीद के चिराग़ जलाये हैं
ये साल था,ये साल था
उम्मीदों का,
हिम्मत का,
सहारों का
ये साल था
देखने का
परखने के
ठहरने का
ये साल था
खुशी तलाशने का
ख़ुद को ढूंढने का
रुक कर सोचने का
ये साल था
ज़िन्दगी जीने का
नही बस दिन गुज़ारने का।......
By Noorussaba Shayan

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