Yagya Agni Se Janmi Yagyasaini Hu Mai
Updated: Feb 14, 2024
By Pooja Singh
पांडवों की भार्या हूं
गोविंदा की सखा हूं
चिर अमर अभिमन्यु की माता हूं
मत भूलो यज्ञ अग्नि से जन्मी यज्ञ सैनी हूं मैं
ना मैं बेचारी हूं
ना अबला नारी हूं
है जीवन पथ संघर्ष भरा
हर पथ पर है पाषाण पड़ा
हर व्यूह तोड़ने को है सक्षम
मंजरी सा कोमल मेरा अंतर्मन
अन्याय हो जहां स्त्री पर वहां किसी से ना आश लगाती हूं
हो सभा शूरो की या एक बड़े-बड़े वीरों की
नारी का अपमान करे जो उसको गर्जन कर रण दिखलाती हूं
याचना मेरा स्वभाव नहीं
पांचाल की राजकुमारी हूं
निर्वस्त्र कर रहे मुझको
है शेष नहीं जीवन तुमको
है मौन खड़ी यह अमर सभा
कहां है सबका प्रताप छुपा
ध्वस्त कर दूं सबके धर्म का ताज मैं
क्षण भर में पलट दूं इतिहास मैं
मत भूलो यज्ञ अग्नि से जन्मीं यज्ञ सैनी हूं मैं
है भविष्य का भान मुझे
ममता का है ज्ञान मुझे
बहुत विकट संकट है ये
नारी अस्मिता का प्रश्न है ये
परित्याग दिया ममता को वीर सबल चित्कारी हूं,
आंसु को अंगार बना युद्ध की चिंगारी हूं!!
क्रांति का हूं अवतार मैं
गीता का हूं सार मैं
अब सिर्फ रण नहीं विध्वंस होगा
मानुष वेश छिपे व्यालो को अब ना क्षमा शेष होगा
स्वयं काल भी अब डोलेगा
नारी के प्रण के आगे अब ना वह अपने पट खोलेगा
था मौन जो समाज खड़ा
अब है अपने अंजाम पर पड़ा अंतर्मन के है रण को जीता
हृदय है विष का प्याला पीता
तपता है अंगारों सा मेरा मन
अग्नि से तपकर बन गया है कुंदन
ममता की मूरत हूं मैं तो
चण्डी की अवतार भी मैं
मत भूलो यज्ञ अग्नि से जन्मी यज्ञ सैनी हूं मैं
By Pooja Singh

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