Yadon Ka Silsila
By Khushbu Sharma
बड़ी मुश्किल से इस दिल को बहलाया था
कि फिर तेरी याद इसे रुलाया था।
तुझे वो मेरा पहली बार देखना,और
तेरा वो नजरें झुका कर मुस्कुराना दिल ले गया था।
याद आयी तेरे साथ की वो पहली मुलाकात
जब हाथ मेरा तेरे हाथ में था, और वो हसींन
लम्हा तेरे साथ बिताया था।
याद आयी तेरे साथ की वो पहली बारिश
भीगती हुयी आफरीन से भी
ज्यादा खुबसूरत लग रही थी तुम,
और वो पल मुझ से भुले नहीं भुलाया था।
तेरे चेहरे का वो नूर, जिसे देखकर में खिल उठता था
कितना खुबसूरत था वो समा,
मेरा हर दिन तेरी मुस्कान से शुरू हुआ करता था।
तेरी शरारत भरी उन निगाहों का में दिवाना था,
जब भी देखता उनमें में खुद को ही खो दिया करता था।
अब तु नहीं है बस तेरी यादों का सिलसिला है
भूल चूका था में सब कि ,
सामने आ गया जो तेरा खत पडा़ है।।
याद आयी वो बातें तेरे साथ की
जिन्हे मेंने कब का भूला दिया था।
बड़ी मुश्किल से इस दिल को बहलाया था
कि फिर तेरी याद ने इसे रुलाया था।
By Khushbu Sharma

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