Wo Ladki Mil Jaaye To.....
By Vikram Jit
नए जमाने की लड़कियों में कुछ लड़कियां ऐसी भी होती है
जिनके कपड़े नए जमाने के होते है
पर इश्क उन्हे पुराने जमाने का चाहिए होता है
इनके पास सब कुछ मॉडर्न ही होता है
कपड़ो से लेकर मेकअप तक
दोस्तों से लेकर बैकअप तक
पर
इश्क के मामले में ख्याल पुराने होते है इनके
इन्हे तुम्हारे साथ लॉन्ग ड्राइव पर नही
पैदल चल कर अपने किस्से सुनाने होते है
इनके लिए पर्फेक्टली गोल बने डोमिनोज पिज्जा से ज्यादा प्यारा तुम्हारा बनाया गया बेढंगा परांठा होता है
महंगे रेस्टोरेंट में कॉफी नही
नुक्कड़ वाली चाय में इन्हे सुकून मिलता हैं
दोस्तों के साथ क्लब में बहुत धूम मचाती है ये
पर तुम्हारे साथ इन्हे पुराने हिंदी सदाबहार गाने भाते है
इनका जुनून आज के वक्त से भी आगे का होता है
पर सुकून इन्हे चाहिए वैसा जिनकी लोग बस पुरानी बातें करते हैं
वो लड़कियां ढूंढी नही जाती
वो तो बस यूं ही किसी रोज मिल जाती है ऐसे ही
जब तुम खुद को तलाश कर रहे होगे
वो लड़कियां प्यार के लिए नही
इश्क करने के लिए बनी होती हैं
सुकून नशा जुनून अदा
एक नजर दिखे वो लड़की और फिर सब हवा
और जब कभी तुम्हे वो लड़की मिले जाए तो
तो दूर से एक टक निहारना उसे
देखना उसे जिंदगी को गले लगा कर जीते हुए
देखना उसे चाय को दोनो हाथों में थाम कर उसकी चुस्कियां पीते हुए
देखना उसे खुद ही खुद के साथ खुश रहते हुए
देखना उसे लोगों के साथ पानी जैसा बहते हुए
देखना उसे अकेले में खुद के साथ झगड़ते हुए
देखना उसे फूलों के ताजा गुच्छे देख उनके पीछे पड़ते हुए
छुप छुप कर दूर कही किसी पेड़ के पीछे से
देखना उसे तुम बच्चों जैसी नादानियां करते हुए
देखना उसे भोले और प्यारे से चेहरे के साथ बड़ी बड़ी शैतानियां करते हुए
देखना उसे तुम बिखर कर दुबारा निखरते हुए
देखना उसे तुम हर पतझड़ को भी बसंत करते हुए
देखना तुम उसकी मासूमियत को अठखेलियां करते हुए
देखना उसे तुम जिंदगी को जिंदा करते हुए
पर जब तुम्हे देखो ना
तब बस उसे ही देखना
समझाना मत उसे तुम कुछ भी
और ना ही पास जाना उसके
बस दूर से निहार लेना उसे
महसूस करना उसे उन लम्हों में
जिन लम्हों में वो खुश है
जो उसी के साथ वहीं थम जाते है
पर जब तुम्हे देखो ना
तब बस उसे ही देखना
मत देखना तुम आस पास के लोगों को
क्यों के जब तुम उसे निहार रहे होगे तो अपने आप दिल तुम्हारा तुम्हारे चेहरे पर एक मुस्कान लाकर रख देगा
और जब कभी तुम्हे वो लड़की मिल जाए
जब कभी लगे तुम्हे की जिंदगी क्या है।
तब उसे एक बार फिर से बस निहारने जाना और
दिसंबर के एक सुनहरी धूप वाले सबसे छोटे दिन में जब वो आधा दिन खत्म करके हल्की हल्की नींद में अपने दोनो पैरों को सिकोड़ कर उनपर कोहनियों टीका कर चाय पी रही होगी
तब उसे निहारते हुए तुम समझ जाओगे की ये जिंदगी है
और वो बहुत खूबसूरत है ।
By Vikram Jit

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